"खुशियों की दास्तां" |
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टीकमगढ़ | 29-नवम्बर-2019 |
टीकमगढ़ जिले में बेटियों को पढ़ाने के लिये बनाये गये एक स्कूल से बेटियों की पढ़ाई का मार्ग प्रशस्त हुआ जिससे न सिर्फ उस गांव की बेटियां शिक्षित हुईं, बल्कि आस-पास के अन्य गांवों की बेटियों को भी शिक्षा से जुड़ने का अवसर मिला। टीकमगढ़ शहर से 10 किमी दूर नीमखेरा गांव के पास 1990 में श्री लाला हरदौल जू कन्या पाठशाल का निर्माण कराया था। तब गांवों के लोग बेटियों को पढ़ाने के लिये स्कूल नही भेजते थे। ऐसी परिस्थति में 2 छात्राओं से स्कूल में पढ़ाई शुरू की गई। स्कूल के शिक्षक शेख मगन ने बताया कि दो छात्राओं में एक छात्रा नातीराजा के मैनेजर के प्रसाद तिवारी की बेटी प्रीति तिवारी भी थी। दोनो छात्राओं ने मिडिल स्कूल तक इसी स्कूल में पढ़ाई की। आज प्रीति तिवारी शिक्षक है और दूसरी छात्रा पंचायत सचिव के पद पर पदस्थ हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि स्कूल से पढ़ी हुईं हर छात्रा आज किसी न किसी रूप में आत्मनिर्भर है और स्कूल का नाम रोशन कर रही है। दरअसल 25-30 साल पहले जिले के ज्यादातर गांवों में शासकीय स्कूल नहीं थे। जिसके चलते ग्रामीण इलाकों के बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ता था। खासतौर पर बेटियों को पढ़ाने के लिये माता-पिता घर से दूर नहीं भेजते थे। ऐसी परिस्थति को देखते हुये सन् 1990 में ओरछा रियासत के नातीराजा मधुकर शाह ने बुंदेली स्थापत्य कला से नीमखेरा गांव के पास श्री लाला हरदौल जू कन्या पाठशाला का निमार्ण कराया, जिसमें गांव की बेटियों को शिक्षित करने के लिये निःशुल्क पढ़ाई शुरू की गई। यह स्कूल आज भी संचालित है। सामाजिक सहभागिता की मिशाल सामाजिक सहभागिता की मिशाल इस स्कूल के अंदर लगे शिलालेख में भवन बनाने वाले कारीगर, मजदूर से लेकर निरीक्षण करने वालों और हिसाब-किताब रखने वालों के नाम आज भी लिखे हैं। शिलालेख में भवन निमार्ण का साल, स्कूल के नाम के साथ शैली निर्माण में मधुकर शाह जू देव का नाम अंकित है, साथ ही प्रथम निरीक्षण के प्रसाद तिवारी, द्वितीय निरीक्षण में शैलेन्द्र तिवारी का नाम लिखा है। निर्माण के दौरान हिफाजत करने वालों में घुरके काछी, पहाड़ सिंह, मुंशी नसीम खां, प्रथम कारीगर अहसान, दीगर कारीगर कन्हैया अहिरवार, कैईया अहिरवार, ग्यासी अहिरवार, परमा अहिरवार के नाम लिखे है। इसके अलावा मजदूरों में दशरथ सिंह, भान सिंह चौदा काछी, चुन्नीलाल काछी सहित 13 मजदूरो के नाम लिखे गये हैं। |
शनिवार, 30 नवंबर 2019

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बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये बनाये गये स्कूल की बेटियां आज आत्मनिर्भर होकर नाम रोशन कर रहीं हैं "खुशियों की दास्तां"
बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिये बनाये गये स्कूल की बेटियां आज आत्मनिर्भर होकर नाम रोशन कर रहीं हैं "खुशियों की दास्तां"
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