
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली एवं म0प्र0 राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जबलपुर के निर्देशानुसार एवं जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष श्रीमती सुनीता यादव के मार्गदर्शन में आज बुधवार को राष्ट्रीय शिक्षा दिवस के अवसर पर विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन ए.डी.आर भवन जिला न्यायालय दतिया में किया गया।
विधिक साक्षरता शिविर में मुख्य अतिथि सचिव एवं अपर सत्र न्यायाधीश जिला न्यायालय दतिया श्री दिनेश कुमार खटीक ने बताया कि देश के पहले शिक्षा मंत्री मौलाना अब्दुल कलाम आजाद की याद में उनके जन्मदिवस के अवसर पर प्रतिवर्ष देश में 11 नवंबर को राष्ट्रीय शिक्षा के रूप में मनाया जाता है। अब्दुल कलाम आजाद न केवल महिलाओं की शिक्षा पर जोर दिया बल्कि उन्होने 14 वर्ष की आयु तक के सभी बच्चों के लिये निःशुल्क प्राथमिक शिक्षा के साथ-साथ व्यवसायिक प्रशिक्षण और तकनीकी शिक्षा प्रदान किये जाने हेतु भी प्रयास किये।
न्यायाधीश द्वारा जानकारी देते हुये यह भी बताया कि भारत की सर्वोच्च विधि भारत का संविधान हैं। संविधान में मूल अधिकार एवं कर्तव्यों का उल्लेख किया गया हैं। सभी को अपने मूल अधिकारों के प्रति जागरूक रहने के साथ-साथ अपने कर्तव्यों का भी पालन करना चाहिये, तभी हम अपने गॉव, शहर, राज्य एवं देश का विकास कर सकेंगे। मूल अधिकार में छः से चौदह वर्ष के बच्चों से कोई भी ऐसा कार्य नहीं कराये जाने, जिससे उनके शारीरिक विकास पर विपरित प्रभाव पड़ता हो, रोक लगाई गई हैं किन्तु ग्रामीण परिवेश में बच्चों को शिक्षा के अवसर नहीं दिये जाकर खेत-खलिहान में या मजदूरी आदि कार्यो में लगा दिया जाता हें, जिससे उनका विकास रूक जाता हैं।
विधिक जागरूकता शिविर का संचालन व आभार प्रदर्शन श्री सुनील त्यागी ने करते हुये बताया गया जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा समय-समय पर विधिक जागरूकता एवं साक्षरता शिविरों का आयेाजन किये जाने के पीछे उद्देश्य शिविरों के माध्यम से संविधान द्वारा दिये गये अधिकारों एवं प्रचलित कानूनों के प्रति लोगों को जागरूक किया जाना है। शिविर में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दतिया के पैरालीगल वालेंटियर्स उपस्थित रहे।
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